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Wednesday, August 3, 2011

Just.... as it is...

उसके गाँव के बारे में सोंचता हूँ तो दिल भर आता हैं|
उसके गाँव के तरफ चलता हूँ, तो पैर भर आते हैं |
उसके गाँव को किसी नक़्शे में देखता हूँ, 
तो कमबख्त आखें भी भर आती हैं ||

Friday, July 29, 2011

A Poem of a broken heart!!

A poem from a broken heart!

हमने चाहा उसको जी जान लुटाकर, 
उसने भी खेला हमसे थोडासा प्यार जताकर |
हम तो प्यार की राह पर लुटते ही चले गए, 
वह भी हमारे दिलसे खेलते ही चले गए|
अंजाम होना था वही हुआ .....
हम लूटकर ख़तम हो गए, मुक्त हो गए|
वह भी अपना खिलौना खोकर बैठ गए ||
शायद उन्हें कोई खिलौना मिलेगा भी, 
पर दिलवाला खिलौना नहीं मिलेगा कभी |
यह शिकायत नहीं मेरे दोस्त, दुआए है |
उसको जिसके लिए हमने खुदको लुटाया है |
की उसको ना मिले कोई खिलौना, 
ना उसकी हो पूरी दिलकी यह तमन्ना, 
ना वह किसी और का दिल तोड़े, 
ना कोई और उसकी शिकायत के आंसू रोयें |||

यतीन..