A poem from a broken heart!
हमने चाहा उसको जी जान लुटाकर,
उसने भी खेला हमसे थोडासा प्यार जताकर |
हम तो प्यार की राह पर लुटते ही चले गए,
वह भी हमारे दिलसे खेलते ही चले गए|
अंजाम होना था वही हुआ .....
हम लूटकर ख़तम हो गए, मुक्त हो गए|
वह भी अपना खिलौना खोकर बैठ गए ||
शायद उन्हें कोई खिलौना मिलेगा भी,
पर दिलवाला खिलौना नहीं मिलेगा कभी |
यह शिकायत नहीं मेरे दोस्त, दुआए है |
उसको जिसके लिए हमने खुदको लुटाया है |
की उसको ना मिले कोई खिलौना,
ना उसकी हो पूरी दिलकी यह तमन्ना,
ना वह किसी और का दिल तोड़े,
ना कोई और उसकी शिकायत के आंसू रोयें |||
यतीन..
vah vah... yateen ji..yakeen nahi aata, aap to shayari me rustum nikale...
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